आग उगलती गर्मी में मासूमों ने अल्लाह की राह में रोजे रखकर मिशाल पेश किए।

रिपोर्ट- अनीस अख्तर

Editor yash pathak 9140290705

गोपीगंज । माहे रमजान का पाक मुकद्दस महीना होता है। जिसमे रोजे हर औरत,मर्द,पर फर्ज है। जिसका बयान घर के मासूम बच्चे भी सुनते है और रोजे रखने को बेताब रहते है। और अल्लाह की बेशुमार नेयमते पाने को बेताब रहते हुए रोजे रखते है। जैसा की सराय मोहाल निवासी मोहम्मद आलम राइन की शाहबजादी अर्शिया आलम और शाहबजादे अल्फैज आलम ने इस भीषण गर्मी में रोजा रखकर अपने पुख्ता ईमान की गवाही दी । अल्फैज आलम ने कहा कि एक इबादत के बदले 70 सवाब है तो रोजा क्यूँ छोड़ू। 7 वर्षीय अर्शिया आलम कहती हैं कि अम्मी-पापा सब रोजा रहते हैं तो मैं अपने लिए रोजेदार से खाना कैसे बनवाऊं। रोजा अफ्तार के बाद उनके दादा दादी ने बच्चो के हौसले पर उन्हें फूल मालाओं से लादकर हौशला आफजाई किया।

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